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धान खरीदी में लापरवाही बर्दाश्त नहीं, प्रशासन ने की कड़ी कार्रवाई, तीन निलंबित

रायगढ़, 2 जनवरी 2026। खरीफ विपणन वर्ष 2025–26 के अंतर्गत जिले में संचालित धान खरीदी व्यवस्था को पारदर्शी एवं अनुशासित बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। विभिन्न उपार्जन केंद्रों के निरीक्षण एवं जांच में गंभीर अनियमितताएं उजागर होने के बाद कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के अनुमोदन से दोषी समिति प्रबंधकों एवं सहायकों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की गई है।और वहीं सहकारिता विभाग की जांच में यह तथ्य सामने आया कि कई धान खरीदी केंद्रों में शासन द्वारा निर्धारित ढाला पद्धति से धान का परीक्षण नहीं किया जा रहा था। किसानों द्वारा लाए गए धान को बिना गुणवत्ता परीक्षण के सीधे शासकीय बोरों में भरकर तौल किया जा रहा था। इसके अतिरिक्त धान खरीदी प्रक्रिया में लापरवाही, उदासीनता और नियमों की अनदेखी जैसे गंभीर मामले भी सामने आए।

वहीं उप आयुक्त सहकारिता विभाग ने बताया कि आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित जमरगीडी (पं.क्र. 1553) के सहायक समिति प्रबंधक एवं धान खरीदी प्रभारी दीनबंधु पटेल द्वारा बार-बार शासन निर्देशों की अवहेलना करते हुए मनमाने ढंग से धान खरीदी की जा रही थी। कारण बताओ सूचना पत्र का संतोषजनक उत्तर प्रस्तुत न किए जाने पर उनका वित्तीय प्रभार तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया गया।इसी प्रकार आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित कापू (पं.क्र. 48) के सहायक समिति प्रबंधक श्याम नारायण दुबे द्वारा भी शासन निर्देशों की अनदेखी कर धान खरीदी में लापरवाही बरती गई।

जवाब असंतोषजनक पाए जाने पर उनका भी वित्तीय प्रभार तत्काल प्रभाव से समाप्त किया गया।वहीं आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित छाल (पं.क्र. 615) के सहायक समिति प्रबंधक ठंडाराम बेहरा तथा आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित कोड़ासिया (पं.क्र. 833) के समिति प्रबंधक एवं फड़ प्रभारी प्रहलाद बेहरा द्वारा गंभीर लापरवाही बरते जाने और कारण बताओ सूचना पत्र का उत्तर प्रस्तुत न करने पर दोनों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।इसके अलावा आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित खड़गांव (पं.क्र. 180) में धान उपार्जन केंद्र के नोडल अधिकारी के विरुद्ध गाली-गलौच एवं धमकी देने की शिकायत जांच में सही पाई गई। साथ ही सहायक समिति प्रबंधक कृपाराम राठिया द्वारा भी धान खरीदी में गंभीर लापरवाही सामने आई।

जांच प्रतिवेदन के आधार पर उन्हें भी तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ राजपत्र (असाधारण) के अनुसार 15 नवम्बर 2025 से 31 जनवरी 2026 तक की संपूर्ण धान खरीदी अवधि में धान उपार्जन कार्य से जुड़े सभी कर्मचारियों पर आवश्यक सेवा संधारण एवं विच्छिन्नता निवारण अधिनियम 1979 (ESMA) लागू है।जिला प्रशासन ने सभी समितियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि धान खरीदी का कार्य पूर्ण पारदर्शिता, निर्धारित नियमों एवं प्रक्रियाओं के अनुरूप किया जाए, ताकि किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो और शासन की योजनाओं का लाभ सही रूप में वास्तविक हितग्राहियों तक पहुंचे।

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